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लाखों में है इस बकरे की कीमत, ब्रेकफास्ट में दूध-लंच में खाता है ड्राई फ्रूट

2 सितंबर को बकरीद है। इस दिन बकरे की कुर्बानी देना सवाब का काम माना जाता है। इसी कड़ी में 5 दिन पहले से ही लखनऊ की बकरा मंडी सज गई है। मंडी में बकरों की तकरीबन 15 नस्लें बिकने के लिए आई हैं। इनकी कीमत 4 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक है। इसमें एक खास किस्म का बकरा भी शामिल है, जो राजस्थान से लाया गया है। इसकी डाइट भी स्पेशल है। लंच में ड्राई फ्रूट-ब्रेकफास्ट में दूध पीता है।
इसलिए महंगी है कीमत…
– मंगलवार को दिनभर राजधानी के गऊघाट स्थित बकरामंडी में बकरा खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। दुकानदारों ने भी ग्राहकों को लुभाने के लिए बकरों को पूरी तरह से सजा रखा है।
– बकरा मंडी में तकरीबन 4 हजार बकरे बिकने के लिए आए हैं। लेकिन मंडी में दुम्बा प्रजाति के केवल दो ही बकरे अभी तक दिखाई दिए हैं।
– इनको लेकर बाराबंकी के हैदरगढ़ से आए मो. वसीम ने बताया, ”इन खास किस्म के बकरों को 1 साल पहले राजस्थान के अजमेर से खरीदा था। उस समय यह 3 महीने के थे।”
– ”दोनों बकरों को 1 लाख 20 हजार रुपए में खरीदा था। आज यहां बकरीद की बकरा मंडी में लेकर आए हैं, 3 लाख में बेचकर अच्छे दाम कमाएंगे।”
– ”इस बार मंडी में महगाई का खासा असर दिख रहा है। भारी बारिश की वजह भी बकरा मंडी का व्यवसाय काफी कम हो रहा है।”
ये है इन बकरों की डाइट
– बकरो के मालिक वसीम ने बताया, ”इनको तैयार करने में भी काफी पैसे खर्च हुए हैं। रोजाना तकरीबन 600 रुपए का खर्च आता है।”
– इनका खानपान भी खास है। सुबह ब्रेकफास्ट में मटर की भूंसी के साथ चना और 1 -1 लीटर दूध पीते हैं। दोपहर में इन्हे गेंहू, भूंसा और ड्राई फ्रूट दिया जाता है।”
– ”अभी तक इनकी कीमत 2 लाख 20 हजार रुपए लग चुकी है, लेकिन 2 लाख 75 हजार तक दाम मिल गया तो बेच देंगे।”
– ”इसके आलावा ड्राई फ्रूट भी इनका खास भोजन है, लेकिन महंगाई ज्यादा होने की वजह से एक दिन में सिर्फ 100 रुपए के खिला पता हूं।
दुम्बा बकरों की नहीं होती सींग
– दुम्बा बकरों के सींग नहीं होती है। माना जाता है कि अगर इत्तेफाक से किसी दुम्बा बकरे की सींग निकल गई तो उसकी कीमत लाखों से हजार में आ जाती है।
– लोग यह भी कहते हैं कि सींग वाले बकरे दुम्बा प्रजाति के नहीं होते हैं। ऐसे में बिना सींग वाले दुम्बा बकरे की ही डिमांड ज्यादा रहती है।
खास बकरे की कुर्बानी देने से मिलता है सबाब
– लोगों का मानना है कि एक बार अल्लाह ने अपने दूत हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी।
– इसपर दूत ने अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान करने का फैसला किया। इस काम के लिए बेटा भी खुशी-खुशी तैयार हो गया।
– कुर्बानी के समय दूत ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। उसने जैसे ही पट्टी हटाई तो उसका बेटा सही सलामत सामने खड़ा था। वहीं, एक कटा हुआ बकरा जमीन में पड़ा था।
– इसके बाद से ही बकरीद मनाने की शुरुआत हुई। मान्यता यह है कि उस समय जिस बकरे की कुर्बानी हुई थी वो दुम्बा प्रजाति का बकरा था।
– इसके बाद दुम्बा प्रजाति के बकरे की कुर्बानी मुस्लिम धर्म के लोग सबसे सबाब का काम मानते हैं।

https://www.bhaskar.com/news/UP-LUCK-special-story-on-bakra-5681765-PHO.html

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Below is a brief guide to the rules and recommendations of Qurbani.

A brief guide to eligible animals is:

The following animals are not to be used for Qurbani: